एशिया से तीसरे विश्व युद्ध का खींच गया खांका

तीसरे विश्व युद्ध की धमक पूरी दुनिया में सुनाई पड़ने लगी है। यह कब शुरू हो जाए कहा नहीं जा सकता, लेकिन जो हालात बन रहे हैं, उससे तो यही दिख रहा है। उत्तर कोरिया के तानाशाह शासक किम जोंग का एक के बाद एक मिसाइल परीक्षण और हमले की धमकी से तो ऐसा ही लग रहा है। उत्तर कोरिया पर चीन का काफी प्रभाव है। लेकिन वह उसे मनाने की कोशिश में किसी तरह से नहीं लगा है। यहां तक की उसने साफ कह दिया है कि अगर अमेरिका उत्तर कोरिया पर हमला करता है तो वह उसका साथ देगा।
इधर डोकलाम को लेकर चीन और भारतीय सेनाएं आमने-सामने हैं। चीन लगातार युद्ध की धमकी दे रहा है। अगर ऐसा हुआ तो यह भी विश्व युद्ध का एक कारण ही बनेगा।

अमेरिका ने कहा है कि डोकलाम विवाद पर वह बातचीत का समर्थन करता है। गतिरोध खत्म करने के लिए भारत-चीन को बातचीत की मेज पर आना चाहिए। बता दें कि 16 जून से सिक्किम सेक्टर के डोकलाम एरिया में विवाद चल रहा है। चीन उसी शर्त पर बात करना चाहता है, जब भारतीय सेनाएं पीछे जाएं। वहीं भारत, दोनों देशों की सेनाओं के वापस लौटने पर ही बातचीत चाहता है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के स्पोक्सपर्सन हीथर नुअर्ट ने कहा कि डोकलाम के हालात पर हम करीब से नजर रख रहे हैं। हमारे भारत-चीन दोनों से अच्छे रिश्ते हैं। इसलिए हम दोनों ही देश की सरकारों को बातचीत के लिए एनकरेज करना जारी रखेंगे।

डोकलाम विवाद के बीच चीन ने गुरुवार को फिर धमकी दी थी। चीन के सरकारी अखबार पीपुल्स डेली ने कहा था, अपनी फौज ना हटाकर भारत अब आग से खेल रहा है। इंडियन आर्मी ने जंग की तैयारी शुरू कर दी है। उसने डोकलाम के आसपास के कई गांव खाली करा लिए हैं। अगर भारत डोकलाम से सेना नहीं हटाता है तो यही समझा जाएगा कि वो आग से खेल रहा है और जल जाएगा। चीन की यह भाषा बताती है कि वह भारत पर युद्ध थोप सकता है। ऐसी स्थिति में क्या होगा? अमेरिका कह चुका है कि वह भारत के साथ है। चीन अन्य दुश्मन देश भी निश्चित तौर पर भारत का साथ देंगे। ऐसे में यह युद्ध विश्व युद्ध का रूप न ले, कहा नहीं जा सकता।

भूटान बोला, डोकलाम हमारा एरिया

डोकलाम विवाद पर अब तक चुप रहने वाले भूटान ने भी भारत का साथ दिया है। न्यूज एजेंसी से बातचीत में भूटान सरकार के एक ऑफिशियल सोर्स ने कहा, हमने चीन को ये मैसेज भेज दिया है कि आप हमारे इलाके में सड़क बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच 1988 और 1998 में समझौते हो चुके हैं और सड़क बनाने की ये कोशिश उसका वॉयलेशन है।

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